Monday, March 23, 2009

Tuesday, February 17, 2009

उठ जवान हिंद के...




उठ जवान हिंद के...
उठ जवान हिंद के, पुकारता है ये जहां।।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
पुकारती है कश्मीर की घाटियां तो आओ रे।
बिछड़ रहा वो स्वर्ग, उठ जरा उसे बचाओ रे।।
शांत है कटार, क्यों जुबां तुम्हारी मौन है।
होते टुकड़े मां के, तुमको रोकता वो कौन है।।
सरजमीं पुकारती उठो हो सोए तुम कहां।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
उठ जवान हिंद के, पुकारता है ये जहां।।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
वो काफिले विदेश के, बसे जो हिंद में यहां।
जुंबा वो जिसने, हिंद देश के विरुद्ध कुछ कहा।
उठी नजर है आज जिसकी ताज-ए-हिंदोस्तान पर।
जुबां-नजर-वो काफिले, जला दो जलती आग पर।
निशान उन दरिंदों का, न बाकी रह सके यहां।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
उठ जवान हिंद के, पुकारता है ये जहां।।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
सह लिया बहुत, न चुप रहेंगे अत्याचार से।
किया विनम्र आग्रह, न अब करेंगे बात प्यार से।
न होगी बंसी हाथ में, लिए बंदूकें-तोप से।
न अब रुकें-खड़ी भले हो लड़ पड़ेंगे मौत से।
विश्व पर चमकती-जलती हिंद की रहे शमां।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
उठ जवान हिंद के, पुकारता है ये जहां।।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।

Wednesday, January 28, 2009

funny joke


Nasha Hume Ho Jata HaiI

ljam Sharab Pe Aata Hai

Isme Kasoor Sharab Ka Nahi

Kasoor Uska Hai Jiska Chehra Hume

Har Jaam Me Nazar Aata Hai

Kya Karege ishq Kar K DosTo,

Jab Chahne Wale Ne Hi Dil Tod Diya,

Hum Per Shaq Na Karo Dosto,

Kyon ki humne To Ab Ishq karna hi Chod Diya.

Friday, January 23, 2009

Apki khushi



Apki khushi ki chah karte hai,
Bas itna sa gunah bar-bar krte hai,


Aaj fir intezar hai ap ka,


Dekhana h kab ap yaad karte hai.


Tuesday, December 2, 2008

सच बोलता हूँ

सच बोलता हूँ झूठ की आदत नहीं मुझे
तेरे सिवा किसी की कोई चाहत नहीं मुझें ।
बता ऐ दोस्त अपने लिए सोंचू किस तरह
तेरे बारे में सोचने से फुरशत नही मुझें ॥

मोम की तरह पिघलती है जिन्दगी
ग़मों की आग में जलती है जिन्दगी ॥
ठोकर लगाने पर गम नही करना
ठोकर लगकर ही संभालती है जिन्दगी ॥


होड़ लगी है आतंवाद की ।


देववाद की दनुजवाद की की ॥


मानवता को पूछो कौन ।


देखो तो सब पडे है मौन ॥


कुचल रहा है सबको देखो ।


आंतक नाश के बहाने से ॥


फेल रहा है उसका देखो ।


अपना पैर ठिकाने से ॥


किसको छोड़ा किसको बख्शा ।


जन नही तो जानो आज ॥


काबुल और कंधार को देखो ।


देखो भारत की बिगड़ी साज ॥


फांसी चढ़ते सद्दाम को देखो ।


देखो लुटती अबला की लाज ॥


इजरायल कब रोया है ।


याद करो उस को भी तुम ॥