Friday, November 20, 2009
जल है जीवन की तरंग
दोबारा हुआ सृष्टि का निर्माण
आखिर अंग्रेजी सीखना मुश्किल क्यों
Friday, October 9, 2009
शायरी--खिड़की से देखा तो
दूर होने का एहसास होता है...!!
हिचकियों से एक बात का पता चलता है, कि कोई हमे याद तो करता है,
बात न करे तो क्या हुआ, कोई आज भी हम पर कुछ लम्हे बरबाद तो करता है,
ज़िंदगी हमेशा पाने के लिए नही होती, हर बात समझाने के लिए नही होती,
याद तो अक्सर आती है आप की, लकिन हर याद जताने के लिए नही,
होती महफिल न सही तन्हाई तो मिलती है, मिलन न सही जुदाई तो मिलती है,
कौन कहता है मोहब्बत में कुछ नही मिलता, वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है,
कितनी जल्दी ये मुलाक़ात गुज़र जाती है प्यास भुजती नही बरसात गुज़र जाती है,
अपनी यादों से कह दो कि यहाँ न आया करे नींद आती नही और रात गुज़र जाती है,
उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं, वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं,
सोचते हैं तुम्हें इतना याद न करें, लेकिन आंखें बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं,
कभी कभी दिल उदास होता है हल्का हल्का सा आँखों को एहसास होता है,
छलकती है मेरी भी आँखों से नमी जब तुम्हारे दूर होने का एहसास होता है...!!
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लोग कहते हैं मुझे,
लोग कहते हैं मुझे,पत्थर सा दिल कर लो,सागर सा विशाल हृदय कर लो,चाँद-सूरज की तरह स्थिर हो जाओ,बुरा सपना समझ सब बातें भूल जाओ,देखो सब ठीक हो जाएगा….
कर लूँ मैं सब कुछ,जो तुम इन सवालों का जवाब दे दो,
पत्थर तब तलक ही द्रन रहता है,जब तलक़ हवा-पानी उसे हिलाने की ताक़त नहीं रखते,तेंज आँधियाँ जो सौ बार आएँ,पत्थर में भी अपने निशान छोड़ जाती हैं,और जो ना सह पाए वो,दरख्त की दरारें दे जाती हैं,और जो इससे भी ज़्यादा हद पर हो जाए,पत्थर को टुकड़े-टुकड़े कर,कंकड़ बना देती है…
तब कहाँ वो पत्थर कठोर रह पाता है?
सागर तब तलक ही विशाल रहता है,ग्रह-नक्षत्र, चाँद-तारे, उसके अनुकूल रहते हैं,जो दिशा-दशा बदले इनकी भी,ज्वार-भाटा, सूनामी कितने तूफान ले आते हैं,
तब कहाँ वो सागर शांत-गंभीर रह जाता है?
जो चाँद सूरज की बात करते हो,सूरज तपता रह जाता है,चाँद घटता-बढ़ता नज़र आता है,
दोनों भी स्थिर कहाँ रह पाते है?
जब ग्रहण दोनों को लग जाता है…
सपने रातों में आते है,नींद खुली टूट जाते है,
क्या दिल में दर्द, जिस्म में घाव देकर जाते है?
देखो सब ठीक हो जाएगा…कर लूँगीं मैं सब कुछ…जो तुम इन सवालों के…सही जवाब मुझको दे दो …
ना दे पाओ तो, इतना तो समझ लो, साधारण सा दिल और साधारण सी भावनाएँ लिए, मैं "पवन" हूँ… कुछ और ना बनने को कहो
Tuesday, September 22, 2009
Monday, August 31, 2009
mohabbat
Masoom Si Mohabbat Ka Bus Itna Sa Fasana Hai,
Kagaz Ki Haweli Hai,
Baarish Ka Zamaana Hai,
Shart-E-Mohabbat Hai,
Thursday, April 16, 2009
I Need You Now

Please take me by the hand.
Stand by me in my hour of need,
Take time to understand.
Take my hand, dear friend,
And lead me from this place.
Chase away my doubts and fears,
Wipe the tears from off my face.
I need your hand to hold,
The warmth of your gentle touch
In my world that's grown so cold.
And hold me day by day.
Because with your loving hand in mine,
I know we'll find the way.
Monday, March 23, 2009
Tuesday, February 17, 2009
उठ जवान हिंद के...

उठ जवान हिंद के, पुकारता है ये जहां।।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
पुकारती है कश्मीर की घाटियां तो आओ रे।
बिछड़ रहा वो स्वर्ग, उठ जरा उसे बचाओ रे।।
शांत है कटार, क्यों जुबां तुम्हारी मौन है।
होते टुकड़े मां के, तुमको रोकता वो कौन है।।
सरजमीं पुकारती उठो हो सोए तुम कहां।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
उठ जवान हिंद के, पुकारता है ये जहां।।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
वो काफिले विदेश के, बसे जो हिंद में यहां।
जुंबा वो जिसने, हिंद देश के विरुद्ध कुछ कहा।
उठी नजर है आज जिसकी ताज-ए-हिंदोस्तान पर।
जुबां-नजर-वो काफिले, जला दो जलती आग पर।
निशान उन दरिंदों का, न बाकी रह सके यहां।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
उठ जवान हिंद के, पुकारता है ये जहां।।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
सह लिया बहुत, न चुप रहेंगे अत्याचार से।
किया विनम्र आग्रह, न अब करेंगे बात प्यार से।
न होगी बंसी हाथ में, लिए बंदूकें-तोप से।
न अब रुकें-खड़ी भले हो लड़ पड़ेंगे मौत से।
विश्व पर चमकती-जलती हिंद की रहे शमां।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
उठ जवान हिंद के, पुकारता है ये जहां।।
पुकारती है ये जमीं, पुकारता है आसमां।।
Wednesday, January 28, 2009
funny joke
Friday, January 23, 2009
Apki khushi
Tuesday, December 2, 2008
सच बोलता हूँ
तेरे सिवा किसी की कोई चाहत नहीं मुझें ।
बता ऐ दोस्त अपने लिए सोंचू किस तरह
तेरे बारे में सोचने से फुरशत नही मुझें ॥

होड़ लगी है आतंवाद की ।
देववाद की दनुजवाद की की ॥
मानवता को पूछो कौन ।
देखो तो सब पडे है मौन ॥
कुचल रहा है सबको देखो ।
आंतक नाश के बहाने से ॥
फेल रहा है उसका देखो ।
अपना पैर ठिकाने से ॥
किसको छोड़ा किसको बख्शा ।
जन नही तो जानो आज ॥
काबुल और कंधार को देखो ।
देखो भारत की बिगड़ी साज ॥
फांसी चढ़ते सद्दाम को देखो ।
देखो लुटती अबला की लाज ॥
इजरायल कब रोया है ।
याद करो उस को भी तुम ॥

तुम मोहब्बत हो मोहब्बत का कैसे इजहार करूँ मै ।
तुम खुशबु हो खुशबु को कैसे गिरफ्तार करूँ मै ॥
सांसो में बस गई हो सरगम की तरह जानम ।
दिल में उतर गयी हो धड़कन की तरह जानम ॥
सांसो की डोर तोड़कर जीवन का सीसे वहिष्कार करूँ मै ।
धड़कन के शोर से डरकर दिल का कैसे तिरस्कार करूँ मै ॥
तुम खुशबु हो खुशबु को कैसे गिरफ्तार करूँ मै ॥
पलकों पे बस गई हो तुम ख्वाब की तरह ।
होटों पे सज गयी हो तुम गुलाब की तरह ॥
सपनो को भुलाकर खुमारी का कैसे एतबार करूँ मै ।
रंगीनियों को छोड़कर खुशिया का कैसे व्यापर करूँ मै ॥
तुम खुशबु हो खुशबु को कैसे गिरफ्तार करूँ मै ॥
लबो पे चढ़ गयी हो तुम सुमिरन की तरह ।
मेरे रोम रोम मै बसी हो तुम सिफ्रण की तरह ॥
पूजा बिना तुम्हारी कैसे संस्कार करूँ मै ।
तेरी यादो को भूलकर कैसे परिस्कार करूँ मै ॥
तुम खुशबु हो खुशबु को कैसे गिरफ्तार करूँ मै ॥
Friday, November 28, 2008
मुम्बई हमलों में विदेशियों का हाथ : प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुम्बई हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इन मुम्बई हमलों में विदेशी देशो का हाथ है। उन्होंने कहा कि विदेशी हमलों से देशवासियों की सुरक्षा के लिए इस आतंकी हमलों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पूरी जिम्मेवारी तथा मजबूती से उठाएगें। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुम्बई धमाकों की जड़े देश के बाहर फैली हुई है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि विदेशी शक्तियां जो भारत का अमन-शांति को भंग कर रही है वे इन लोगों को अपनी जमीन पर ही रोक ले वरना इसका खमियाजा उस देश को भुगतना पड़ेगा। मनमोहन सिंह ने कहा कि मुम्बई में जो हमला हुआ है वह पूरे देश पर हमला है इससे समस्त राष्ट्र को गहरा झटका लगा है। इसमें कोई शक नही कि इसमें विदेशी शक्तियों का हाथ है। मनमोहन सिंह ने इस कार्यरत हमलों में मारे गए सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की जो आतेकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। प्रधानमंत्री ने इस हमलें में शहीद लोगों को याद करते हुए कहा कि देश उनका योगदान कभी नही भुला सकेगा। प्रधानमंत्री ने इस हमले में पीड़ित लोगों की जिम्मेवारी लेते हुए कहा कि घायलों को तथा म्तक के परिजनों का हर प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोगों को आश्वासन दिलाया है कि इस हमलें शामिल हर आतंकवादी से निपटा जाएगा , चाहे वह देश का हो या विदेशी हो। प्रधानमंत्री ने इस संकट की घडी से जूझने के लिए देशवासियों से अपील की है कि वे एकजुटता बनाए रखे ताकि आतंकवादियों के इरादों को कमजोर किया जा सके।
राधा का वियोग

Thursday, November 27, 2008
मुंबई धमाका देश के लिए चुनोती
देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला करके आतंकवादियों ने सरकार को प्रत्यक्ष रूप में चुनौती दे डाली है। मुम्बई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल और दो पांचसितारा होटलों (ताज होटल व ऑबराय होटल) सहित सात अलग-अलग स्थानों पर देर रात आतंकवादी हमलों में 101 लोग मारे गए और 287 घायल हुए हैं। सूत्रों के अनुसार मरने वालों में 14 पुलिसकर्मी, छह विदेशी नागरिक और पांच चरमपंथी हैं। आतंकियों ने ताज व ऑबराय होटल सहित विभिन्न स्थानों पर लोगों को बंधक बना लिया है। आतंकवादियों से निपटने के लिए दिल्ली से एनएसजी के 200 कमांडो पहुंच गए हैं।सेना को भी बुला लिया गया है। हालात को देखते हुए पूरे देश में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पूरे देश में हवाई निगरानी बढ़ा दी गई है। देश के गृहमंत्री आर. आर. पाटिल ने कहा कि तीन जगह जहां कार्रवाई चल रही है वहां 10-12 आतंकी हो सकते हैं। मुम्बई पुलिस आयुक्त हसन गफूर ने बताया कि ये हमले सुनियोजित आतंकवादी कार्रवाई है। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमलावारों के पास एके-47, एके-57 व स्वचालित ग्रेनेड हैं। भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दक्कन मुजाहिदीन नाम का एक संगठन ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। आतंकवाद का यह रूप भारत ने संभवतः पहली बार देखा है। यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती है।



